Wednesday, May 26, 2010

सच्ची दोस्ती

दोस्ती एक वो एहसास जो किसी गैर को अपना बना दे,

दोस्ती एक सपना जो पूरा हो जाए,

दोस्ती एक वो रिश्ता जो हमेशा कायम रहे,

दोस्ती एक वो कर्म जो करने पर हमेशा AC

Thursday, May 13, 2010

नजर


एक नजर जो शायद किसी को खोज रही थी,

न जाने क्यों मेरे मन की उत्सुकता को बड़ा रही थी,

क्या है वो जिसे उस व्रद्ध की नजरे खोज रही है,

पास से गुजरते ब्यक्तियो की ओर वो हाथ बढाता था,

ब्यक्ति उसे धिक्कारते हुए आगे बडरहे थे,

उठ रहा था उस व्रद्ध के मन में विचारो का तूफ़ान,

शायद कह रहा था,

हे ईश्वर! क्या नहीं है तेरी इस दुनिया में एक भी इन्सान,

उसकी आँखों में दिख रही थी निराशा की ज्योति,

जो कभी किसी गुजरने वाले को देखकर कम हो जाती थी,

मै जब उसके पास गया उसने फिर वही दोहराया,

उसने दोनों हाथो को मेरी तरफ बढाया

मै ठहरा और थोड़ी देर तक उसे देखता रहा,

फिर मैंने दस का नोट उसकी तरफ बढाया,

वो कृतज्ञता भरी नजरो से मेरी तरफ देखता रहा,

Wednesday, May 12, 2010

प्यार


एक लड़की जिसे देखकर मुझे ऐसा लगा की यही है,
यही है वो जिसकी मुझे तलास थी,
जिसे देखकर मेरे दिल में एक खलबली मच गयी,
उसे देखकर पहली बार ऐसा लगा की मै उससे बात करू,
वो क्लास के दरवाजे के पास बैठी अपनी सहेलियों
से बाते कर रही थी,
और किसी बात पर मुस्कुरा रही थी मै अपनी जगह से उठा
और उसके पास जाने लगा,
तभी मै रुका और यह सोचने लगा की कही वो मेरी दखालान्दगी
से बुरा न मन जाए,
इसलिए मै वापस आकार अपनी जगह पर बैठ गया,
और उसके चेहरे की मुस्कराहट को देखने लगा,
उसको मुस्कुराता देख मै दिल ही दिल मुस्कुरा रहा था,
तब उसने एक सरसरी निगाह चारो ओर दौडाई,
और फिर उसकी सरसरी निगाह मेरे ऊपर आकार टिक गयी,
मै एकदम से घबरा गया,
मुझे लगा कही वो मेरी इस बात पर मुझसे नाराज न हो जाये,
लेकिन सायद उसने इस बात पर ज्यादा गौर नहीं किया था,
लेकिन मै उसकी इस बात से बहुत खुश था,
कम से कम उसने मुझे देखा तो सही,
लेकिन मै इन्ही ख्वाबो में डूबा था की बेल बज गयी,
जब वो जाने लगी तो मै उसे देखता ही रहा,
एक बार उठा और हिम्मत जुटी की मै उससे अपने दिल
की बात जाकर कह दू,
फिर ना जाने क्या हुआ की मै उसके पास जा नहीं पाया,
मेरे दोस्त बार बार मुझसे कह रहे थे की,
की मै उससे अपने दिल की बात कह दू ,
मै उसके पीछे पीछे गया वो कालेज से बहार आई और
अपने भाई के साथ चली गयी,
मै उसे देखता ही रह गया,
वो मेरे कालेज का आखरी दिन था,
मै उसे देखता रहा जब तक वो मेरी नजर से ओझल न हो गयी,
पहली बार मुझे किसी से दूर होते हुए दुःख हो रहा था,
पर आज भी मै उससे मिलाने की आस में एक एक दिन काट रहा हु,
की अगले साल वो मुझे जरुर मिलेगी,
तब मै उससे अपने दिल की जरूर कहूँगा,
अब मै सिर्फ केवल उसके इंतजार में हु,
और वो दिन आयेगा जब मै उससे अपने दिल की बात उससे कहूँगा,
और वो मेरे साथ होगी ,
मुझे इंतजार है उस दिन का,

Sunday, May 2, 2010

यादें


एक तेज धारा सी बही जाती रही यादें वही,

जो कभी किसी के अश्रु का कारन बनी यादे वही,

जो कभी किसी के चहरे पे दे गयी खुशिया यादे वही है,

नया रूप सज्जा नया पर पुरानी है यादे वही,

एक याद को हम याद करके याद में रोते रहे,

एक यादही तो थी वही जिसके सहारे जीते रहे,

Friday, April 23, 2010

नमस्कार


नमस्कार

मै प्रशांत सिंह अपने ब्लॉग समाज के द्वारा हमारे समाज में हो रहे घटनाओं इत्यादि की चर्चा आप से करूँगा ताकि इस सामूहिक चर्चा एवं विचार से समाज की बुराई के अंत का कोई उपाय ढूंढ कर समाज को लाभावान्तित करें !


धन्यवाद !