
एक लड़की जिसे देखकर मुझे ऐसा लगा की यही है, यही है वो जिसकी मुझे तलास थी,
जिसे देखकर मेरे दिल में एक खलबली मच गयी,
उसे देखकर पहली बार ऐसा लगा की मै उससे बात करू,
वो क्लास के दरवाजे के पास बैठी अपनी सहेलियों
से बाते कर रही थी,
और किसी बात पर मुस्कुरा रही थी मै अपनी जगह से उठा
और उसके पास जाने लगा,
तभी मै रुका और यह सोचने लगा की कही वो मेरी दखालान्दगी
से बुरा न मन जाए,
इसलिए मै वापस आकार अपनी जगह पर बैठ गया,
और उसके चेहरे की मुस्कराहट को देखने लगा,
उसको मुस्कुराता देख मै दिल ही दिल मुस्कुरा रहा था,
तब उसने एक सरसरी निगाह चारो ओर दौडाई,
और फिर उसकी सरसरी निगाह मेरे ऊपर आकार टिक गयी,
मै एकदम से घबरा गया,
मुझे लगा कही वो मेरी इस बात पर मुझसे नाराज न हो जाये,
लेकिन सायद उसने इस बात पर ज्यादा गौर नहीं किया था,
लेकिन मै उसकी इस बात से बहुत खुश था,
कम से कम उसने मुझे देखा तो सही,
लेकिन मै इन्ही ख्वाबो में डूबा था की बेल बज गयी,
जब वो जाने लगी तो मै उसे देखता ही रहा,
एक बार उठा और हिम्मत जुटी की मै उससे अपने दिल
की बात जाकर कह दू,
फिर ना जाने क्या हुआ की मै उसके पास जा नहीं पाया,
मेरे दोस्त बार बार मुझसे कह रहे थे की,
की मै उससे अपने दिल की बात कह दू ,
मै उसके पीछे पीछे गया वो कालेज से बहार आई और
अपने भाई के साथ चली गयी,
मै उसे देखता ही रह गया,
वो मेरे कालेज का आखरी दिन था,
मै उसे देखता रहा जब तक वो मेरी नजर से ओझल न हो गयी,
पहली बार मुझे किसी से दूर होते हुए दुःख हो रहा था,
पर आज भी मै उससे मिलाने की आस में एक एक दिन काट रहा हु,
की अगले साल वो मुझे जरुर मिलेगी,
तब मै उससे अपने दिल की जरूर कहूँगा,
अब मै सिर्फ केवल उसके इंतजार में हु,
और वो दिन आयेगा जब मै उससे अपने दिल की बात उससे कहूँगा,
और वो मेरे साथ होगी ,
मुझे इंतजार है उस दिन का,